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उत्तरप्रदेश में कर्जमाफी का 'जुमला' विज्ञापनी दावे से 6 गुना ज्यादा घटिया है यह माल

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उत्तरप्रदेश में कर्जमाफी एक बार फिर ‘चुनावी जुमला’ ही साबित होने जा रहा है. चुनावों के दौरान यह प्रधानमंत्री का वादा था कि सत्ता में आने के बाद किसानों के कर्जे माफ़ किये जायेंगे — साफ़ संदेश था कि गरीब किसानों पर चढ़े कर्जों से उन्हें पूरी तरह मुक्त किया जाएगा. कर्जमाफी के इस वादे में किसी तरह की सीलिंग की शर्त नहीं थी.

उत्तरप्रदेश में 2.15 करोड गरीब (सीमांत व लघु) किसान हैं. इन पर बैंकिंग कर्जा ही 86214 करोड़ रुपयों का है — यानि हर गरीब किसान पर 1.34 लाख रुपयों का क़र्ज़ लदा है. लेकिन ‘एक लाख रुपये तक कर्जमाफी’ के आकर्षक रैपर के साथ इन किसानों के केवल 30729 करोड़ रूपये ही माफ़ किये गए — औसतन केवल 14292 रूपये ही!! राजनीति की भाषा में कहें, तो यह कदम एक बार फिर ‘चुनावी जुमला’ ही साबित हुआ है — और बाज़ार की भाषा में कहें, तो माल विज्ञापन के दावों से 6 गुना ज्यादा ‘घटिया’ निकला!!!

स्पष्ट है कि गरीब किसानों की हालत में इस पैकेज का कोई सकारात्मक असर नहीं होने जा रहा है, क्योंकि ऐसे किसान बहुत ही कम होंगे जो पूर्णतः कर्जमुक्त हो रहे होंगे. गरीबों के सिर पर बैंकों की ‘कुर्की’ की तलवार लटकी रहेगी. इससे बचने की कोशिश करेंगे, तो उन पर ‘महाजनी क़र्ज़’ का फंदा और कसेगा.

कर्जमाफी का वादा प्रधानमंत्री का था. लेकिन कर्जमुक्ति के लिए केन्द्र से कोई मदद नहीं — पूरा भार राज्य सरकार पर. राज्य अपनी आर्थिक स्थिति खराब होने का रोना रोयेगा, तो बैंक अपने दिवालिया होने की आशंका में सिर पीटेंगे. और यह सब किया जाएगा किसानों पर अहसान जताते हुए, उससे हमदर्दी के नाम पर. उधर फिर बड़े पूंजीपतियों और कार्पोरेट तबकों को लाखों करोड़ रुपयों की चपचाप ‘कर्जमाफी’ दे दी जायेगी, लाखों करोड़ रुपयों का उन्होंने बैंकों से जो क़र्ज़ ले रखा है, उसे ‘बट्टेखाते’ में डालकर उन्हें उपकृत कर दिया जाएगा.

तो मित्रो, जुमले तो गरीबों के लिए ही होते हैं और इन जुमलों की शोरबाजी में फायदा तो कुछ लोगों को ही होता है. ये वही लोग हैं, जो आजकल कांग्रेस-भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों और केन्द्र व राज्य की सत्ता का संचालन कर रहे हैं. ये वही लोग हैं, जो अपने चुनावी बांडों के जरिये बिना किसी सार्वजनिक जानकारी के अरबों रूपये इन पार्टियों की तिजोरियों में पहुंचा रहे हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि इस देश में वास्तव में कर्जमाफी किसकी होनी है. … और यह पूरी कसरत की जा रही है फिर से वर्ष 2018 में ताजपोशी के लिए.

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